दुनिया भर में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के बीच अब अल नीनो (El Niño) को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव से आने वाले महीनों में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। इसके कारण कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा, जंगलों में आग और मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने पर विकसित होती है। इसका प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब अल नीनो और मानव गतिविधियों से उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग एक साथ प्रभाव दिखाते हैं, तब तापमान में असाधारण वृद्धि देखने को मिलती है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया पहले ही रिकॉर्ड स्तर की गर्मी का सामना कर रही है। ऐसे में अल नीनो के सक्रिय होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका अधिक असर पड़ सकता है।

भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो के कारण मानसून प्रभावित हो सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में पहले ही गर्मी के कारण गंभीर हालात देखे जा चुके हैं। यदि अल नीनो का प्रभाव मजबूत रहा तो इन क्षेत्रों में मौसम और अधिक चरम रूप ले सकता है।

संयुक्त राष्ट्र ने देशों से अपील की है कि वे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी नीतियों को और मजबूत करें। कार्बन उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण जैसे कदमों को तेजी से लागू करने की जरूरत बताई गई है। साथ ही सरकारों को गर्मी से निपटने के लिए स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की तैयारियां मजबूत करने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर, अल नीनो केवल एक मौसमीय घटना नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुका है। यदि वैज्ञानिकों की आशंकाएं सही साबित होती हैं, तो आने वाले समय में दुनिया को अभूतपूर्व गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

Editor  Shobha Bhati

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