ग्रेटर नोएडा: देश के सबसे आधुनिक और तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे में गिने जाने वाले यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली, नोएडा, मथुरा और आगरा को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण यह अब हादसों का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। हाल के वर्षों में यहां होने वाली दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर औसतन हर दिन दो लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है। विशेषज्ञों और ट्रैफिक अधिकारियों ने इन हादसों के पीछे पांच प्रमुख कारण बताए हैं, जिन पर ध्यान देकर कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। 1. ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ी वजह यमुना एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा निर्धारित होने के बावजूद कई वाहन चालक इससे कहीं अधिक रफ्तार में वाहन चलाते हैं। 120 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ाने के कारण चालक कई बार नियंत्रण खो देते हैं। तेज गति के कारण अचानक ब्रेक लगाने या वाहन मोड़ने की स्थिति में बड़ा हादसा हो जाता है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि अधिकांश दुर्घटनाओं के पीछे ओवरस्पीडिंग प्रमुख कारण है। क्या करें? निर्धारित गति सीमा का पालन करें। मौसम खराब होने पर रफ्तार और कम रखें। लंबी दूरी पर लगातार तेज गति से वाहन न चलाएं। 2. ड्राइविंग के दौरान नींद आना यमुना एक्सप्रेसवे लंबी और सीधी सड़क है। ऐसे में कई चालक लगातार कई घंटों तक गाड़ी चलाते रहते हैं, जिससे उन्हें झपकी आने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रो स्लीप यानी कुछ सेकंड की नींद भी जानलेवा साबित हो सकती है। कई बड़े हादसे ड्राइवर के झपकी लेने के कारण हुए हैं। क्या करें? हर दो घंटे बाद कुछ देर आराम करें। थकान महसूस होने पर गाड़ी रोक दें। रात में ड्राइविंग के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें। 3. टायर फटना और वाहन की खराब स्थिति गर्मी के मौसम में तेज रफ्तार के कारण वाहन के टायर फटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई लोग बिना वाहन की जांच किए लंबी यात्रा पर निकल जाते हैं। वाहन की खराब स्थिति, पुराने टायर और कम हवा का दबाव भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। क्या करें? यात्रा से पहले टायर और ब्रेक की जांच कर लें। पुराने और घिसे हुए टायर बदलें। वाहन की नियमित सर्विस कराएं। 4. गलत लेन में वाहन चलाना यमुना एक्सप्रेसवे पर कई चालक लेन अनुशासन का पालन नहीं करते। अचानक लेन बदलना, गलत दिशा में वाहन चलाना और बिना इंडिकेटर के कट लेना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनता है। भारी वाहनों और छोटी गाड़ियों के बीच टक्कर के कई मामले इसी वजह से सामने आए हैं। क्या करें? हमेशा निर्धारित लेन में वाहन चलाएं। ओवरटेक करते समय इंडिकेटर का प्रयोग करें। अनावश्यक रूप से लेन न बदलें। 5. मौसम और कम दृश्यता कोहरा, बारिश और धूल भरी आंधी के दौरान एक्सप्रेसवे पर दृश्यता काफी कम हो जाती है। ऐसे मौसम में तेज गति से वाहन चलाना बेहद खतरनाक साबित होता है। विशेषकर सर्दियों में घने कोहरे के कारण कई बार दर्जनों वाहन आपस में टकरा चुके हैं। क्या करें? फॉग लाइट का इस्तेमाल करें। मौसम खराब होने पर गति कम रखें। आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें। हर दिन हो रही दो लोगों की मौत ट्रैफिक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं में औसतन हर दिन दो लोगों की जान जा रही है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासन बल्कि यात्रियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चालक ट्रैफिक नियमों का पालन करें और थोड़ी सावधानी बरतें, तो अधिकांश हादसों को रोका जा सकता है। प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी बढ़ते हादसों को देखते हुए प्रशासन ने एक्सप्रेसवे पर निगरानी बढ़ा दी है। जगह-जगह स्पीड कैमरे लगाए गए हैं और ट्रैफिक पुलिस की गश्त भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा, लोगों को जागरूक करने के लिए सड़क सुरक्षा अभियान भी चलाए जा रहे हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation UP: सहारनपुर में सीएम योगी का बड़ा संदेश- ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है जो देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए UP News: राम मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ी, लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती; संत समाज में चिंता की लहर