उत्तर प्रदेश के आगरा में देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ का 251 पवित्र कलशों से भव्य अभिषेक किया गया। पूरे मंदिर परिसर में “जय जगन्नाथ” के जयघोष गूंजते रहे और भक्तों ने भक्ति भाव से पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। देव स्नान पूर्णिमा का पर्व भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा से पहले बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का विशेष स्नान कराया जाता है। इस परंपरा का विशेष महत्व है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 251 कलशों से हुआ भगवान का अभिषेक आगरा के जगन्नाथ मंदिर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ का 251 कलशों से अभिषेक किया गया। इन कलशों में गंगाजल, दूध, दही, शहद, चंदन और सुगंधित जल सहित विभिन्न पवित्र पदार्थ रखे गए थे। जैसे ही भगवान का अभिषेक शुरू हुआ, पूरा मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे। मंदिर में मौजूद भक्तों ने इस दिव्य दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया। सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी भगवान के दर्शन और विशेष पूजा में शामिल होने के लिए उत्साहित दिखाई दिए। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया था, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। क्या है देव स्नान पूर्णिमा का महत्व? हिंदू धर्म में देव स्नान पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान जगन्नाथ को 108 या उससे अधिक कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद भगवान कुछ दिनों के लिए “अनवसर” यानी विश्राम काल में चले जाते हैं और सार्वजनिक दर्शन नहीं देते। इसके बाद भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि देव स्नान पूर्णिमा को रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। भक्ति में डूबा आगरा देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर आगरा पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में रंगा नजर आया। मंदिरों में भजन-कीर्तन, धार्मिक कार्यक्रम और विशेष पूजन का आयोजन किया गया। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान जगन्नाथ की पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। रथ यात्रा की तैयारियां शुरू देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। मंदिर प्रशासन और श्रद्धालु मिलकर रथ यात्रा की व्यवस्थाओं में जुट गए हैं। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं और भगवान के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक देव स्नान पूर्णिमा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। यह पर्व लोगों को भक्ति, सेवा और सामूहिक आस्था का संदेश देता है। आगरा में आयोजित इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम करती हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation 🪔 Shani Trayodashi 2026: कुंभ-मीन समेत 5 राशियों के लिए बेहद खास है 27 जून, शनि दोष से बचने के लिए करें ये उपाय