पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत, नेताओं के बीच मतभेद और ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) से जुड़े विवाद ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी बीच टीएमसी प्रमुख mamata Banerjee और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerujee का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हाल के दिनों में टीएमसी के कई सांसदों और विधायकों के बीच असंतोष की खबरें सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ बागी नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। राजनीतिक संकट तब और गहरा गया जब ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थकों ने पार्टी के भीतर अलग शक्ति केंद्र बनने के संकेत दिए। विधानसभा में अलग गुट को मान्यता मिलने की मांग और कथित हस्ताक्षर विवाद ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस विवाद ने पार्टी के भीतर एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के कुछ सांसदों के दिल्ली पहुंचने और संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अभिषेक बनर्जी ने अचानक दिल्ली का दौरा किया। इसके बाद ममता बनर्जी भी दिल्ली पहुंचीं। माना जा रहा है कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पार्टी के सांसदों को एकजुट रखना, संभावित बगावत को रोकना और विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में भाग लेना था। दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में भी कई बदलाव किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल कर कुछ नए नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इसे पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने और असंतुष्ट नेताओं को संदेश देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संकट केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि नेतृत्व से जुड़ा हुआ भी है। कई नेताओं का असंतोष सीधे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर बताया जा रहा है, जबकि ममता बनर्जी अभी भी पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरे बनी हुई हैं। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पार्टी में उठ रहे असंतोष को नियंत्रित कर पाते हैं या नहीं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह संकट टीएमसी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। Post navigation MP Rajya Sabha Election: तीसरी राज्यसभा सीट पर भाजपा ने खेला नया दांव, महेश केवट होंगे उम्मीदवार भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुआ टीएमसी नेता जहांगीर खान, जबरन वसूली मामले में STF की बड़ी कार्रवाई