कोलकाता/सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। जहांगीर खान पर जबरन वसूली, धमकी देने और अवैध रूप से धन उगाही करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। लंबे समय से फरार चल रहे खान की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही थीं।

जानकारी के अनुसार, STF को गुप्त सूचना मिली थी कि जहांगीर खान भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में छिपा हुआ है और देश छोड़ने की फिराक में है। इसी सूचना के आधार पर STF की टीम ने विशेष अभियान चलाया और उसे सीमा के निकट से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पश्चिम बंगाल लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि जहांगीर खान पर स्थानीय व्यापारियों और व्यवसायियों से जबरन धन वसूलने के कई आरोप हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनसे दबाव बनाकर पैसे मांगे जाते थे और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और जांच शुरू की गई थी।

STF अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद खान से उसके नेटवर्क, सहयोगियों और कथित अवैध गतिविधियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं और क्या धन उगाही का यह नेटवर्क किसी बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ था।

इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण के मुद्दे उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं के खिलाफ लगातार आपराधिक मामलों की खबरें सामने आती रही हैं। वहीं टीएमसी ने कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो जहांगीर खान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस और STF मामले की गहराई से जांच कर रही हैं तथा जल्द ही उसे अदालत में पेश किया जा सकता है।

जहांगीर खान की गिरफ्तारी को पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और अदालत की सुनवाई पर टिकी हुई है।

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