उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अभियान के दौरान करीब पांच किलो चरस के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। बरामद की गई चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह खेप उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी सप्लाई की जानी थी।

इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि एक तस्कर बड़ी मात्रा में चरस लेकर देहरादून पहुंचने वाला है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्पेशल टीम ने शहर के प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी। संदिग्ध वाहन की पहचान होने के बाद उसे रोककर तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान वाहन से लगभग 5 किलो चरस बरामद हुई, जिसके बाद आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

बरामद चरस की कीमत लाखों में

पुलिस के अनुसार बरामद चरस की कीमत अवैध बाजार में लाखों रुपये हो सकती है। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से नशे की तस्करी में सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों में इसकी सप्लाई करता था।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

पूरे नेटवर्क की जांच शुरू

गिरफ्तार आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में कई अन्य तस्कर और सप्लायर भी शामिल हो सकते हैं।

जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

  • चरस की सप्लाई कहां से हुई।
  • किन राज्यों में इसकी डिलीवरी की जानी थी।
  • नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान।
  • वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की जांच।
  • मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण।

यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

युवाओं को बनाया जा रहा था निशाना

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्कर अक्सर युवाओं और छात्रों को अपना निशाना बनाते हैं। स्कूल, कॉलेज और शहरी क्षेत्रों में नशे की मांग बढ़ने के कारण तस्कर लगातार नए नेटवर्क तैयार करने की कोशिश करते हैं।

इसी वजह से पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान और तेज करने का फैसला किया है।

उत्तराखंड में लगातार चल रहा अभियान

राज्य सरकार और पुलिस विभाग लंबे समय से नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चला रहे हैं। विभिन्न जिलों में लगातार छापेमारी कर चरस, स्मैक, गांजा और अन्य मादक पदार्थ बरामद किए जा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

NDPS Act के तहत मामला दर्ज

गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इस कानून के तहत मादक पदार्थों की तस्करी एक गंभीर अपराध है और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा तथा भारी जुर्माने का प्रावधान है।

पुलिस आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग कर सकती है ताकि उससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जा सके।

डिजिटल और वित्तीय जांच भी होगी

पुलिस केवल चरस बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहती। जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच करेंगी।

इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

समाज पर नशे का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की लत युवाओं के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इससे अपराध, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक असुरक्षा बढ़ती है। इसलिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान और परिवारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी भी प्रकार की नशा तस्करी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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