प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है और स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों, सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि वांगचुक ने यह अनशन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शुरू किया था। उनके समर्थन में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठन भी जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। (AP News)

लगातार गिर रही है सेहत

चिकित्सकों द्वारा जारी स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार, लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण वांगचुक के शरीर पर इसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों में वजन घटने, कमजोरी और मांसपेशियों में कमी आने की बात कही गई है। आयोजकों का कहना है कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है

उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है, जिसमें उनके इलाज और चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग की गई है।क्या हैं प्रमुख मांगें?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ व्यापक सुधार की मांग कर रहा है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

  • NEET सहित कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
  • जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
  • छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस सुधार लागू करना।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लाखों छात्रों की मेहनत तभी सार्थक होगी जब परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय होगी।

वांगचुक ने अपने समर्थकों के माध्यम से कहा है कि वे चाहते हैं कि सरकार आंदोलनकारियों से संवाद करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अनशन समाप्त करने के बजाय बातचीत शुरू करने पर जोर दिया है। जंतर-मंतर पर बढ़ रहा समर्थन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों का समर्थन मिल रहा है। कई लोग प्रतीकात्मक उपवास और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से अपनी एकजुटता भी जता रहे हैं। परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल

हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस तेज की है। लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने बार-बार यह चिंता जताई है कि ऐसी घटनाओं से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई से ही छात्रों का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।

डॉक्टरों की निगरानी जारी

आयोजकों के अनुसार डॉक्टर नियमित रूप से वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं, इसलिए चिकित्सा टीम लगातार निगरानी बनाए हुए है

आगे क्या?

फिलहाल आंदोलन जारी है और वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का कोई संकेत नहीं दिया है। दूसरी ओर, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया, संभावित वार्ता और न्यायालय में चल रही कार्यवाही इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

 

 

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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