हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा उनकी बात सुने, लेकिन कभी-कभी डांट-फटकार के बजाय सही तरीका अपनाना ज़्यादा असरदार होता है। बच्चों के व्यवहार को प्यार और समझदारी से बदलने के लिए ये 5 आसान और प्रैक्टिकल टिप्स आज ही आज़माएं! प्यार से समझाएं: गुस्से से बात बिगड़ती है, शांत रहकर समझाएंगे तो बच्चा सुनेगा। विकल्प दें: “यह करो” कहने के बजाय उन्हें दो सही विकल्प दें, जिससे उन्हें अपनी मर्ज़ी का अहसास हो। उनकी बात भी सुनें: जब बच्चा अपनी बात रखे, तो मोबाइल छोड़कर उसे पूरा ध्यान दें। अच्छे व्यवहार की तारीफ करें: जब भी वह कोई अच्छी बात माने, उसकी खुलकर तारीफ करें विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जिद के पीछे अक्सर उनकी भावनाएं, इच्छाएं और ध्यान पाने की जरूरत छिपी होती है। यदि माता-पिता सही तरीके से स्थिति को संभालें, तो बच्चे धीरे-धीरे समझदार और सहयोगी बन सकते हैं। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बच्चे को हर बात पर “नहीं” कहने की आदत क्यों पड़ रही है। कई बार बच्चे अपनी स्वतंत्रता दिखाने के लिए ऐसा करते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी राय को भी महत्व दिया जाए। इसलिए उनकी बात को ध्यान से सुनें और उन्हें महसूस कराएं कि उनकी भावनाएं आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। बच्चों के अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करना भी बेहद प्रभावी तरीका है। जब बच्चा आपकी बात मानता है या कोई अच्छा काम करता है, तो उसकी तारीफ करें। सकारात्मक प्रोत्साहन बच्चे को बार-बार अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है। याद रखें, बच्चे प्रशंसा से ज्यादा सीखते हैं, डांट से नहीं। अगर बच्चा किसी बात पर जिद कर रहा है, तो तुरंत गुस्सा करने की बजाय शांत रहें। माता-पिता का गुस्सा अक्सर स्थिति को और बिगाड़ देता है। शांत स्वर में बात करने से बच्चा भी धीरे-धीरे शांत हो जाता है और आपकी बात सुनने लगता है। मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम का अत्यधिक उपयोग भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को खेलकूद, किताबें पढ़ने तथा रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें। इससे उनका मानसिक विकास बेहतर होगा और जिद्दी व्यवहार कम हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि माता-पिता खुद भी अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करें। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। यदि घर में धैर्य, सम्मान और सकारात्मक संवाद का माहौल होगा, तो बच्चा भी वैसा ही व्यवहार अपनाएगा। हर बच्चा अलग होता है। इसलिए किसी दूसरे बच्चे से उसकी तुलना न करें। प्यार, धैर्य और समझदारी के साथ किया गया मार्गदर्शन ही बच्चे की जिद को सकारात्मक दिशा दे सकता है। याद रखिए, जिद्दी बच्चा बुरा बच्चा नहीं होता। सही मार्गदर्शन और प्यार भरा व्यवहार उसे आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और समझदार इंसान बना सकता है। इसलिए अगली बार जब आपका बच्चा जिद करे, तो गुस्से की जगह समझदारी से काम लें। परिणाम आपको जरूर चौंका देंगे। * रिपोर्टर * ( श्रीमती शोभा भाटी )