पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतुष्टि, कुछ सांसदों के बगावती तेवर और INDIA गठबंधन की हालिया बैठक के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी अब कांग्रेस के और करीब जाएंगी या फिर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेंगी। दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। बैठक के दौरान कांग्रेस नेतृत्व और ममता बनर्जी के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला। विशेष रूप से सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात तथा संवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि ममता बनर्जी कांग्रेस में शामिल होने जा रही हैं। TMC एक स्वतंत्र और क्षेत्रीय रूप से मजबूत राजनीतिक दल है, जिसकी स्थापना स्वयं ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। ऐसे में कांग्रेस में विलय या शामिल होने की संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई देती है। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां उन्हें कांग्रेस के साथ अधिक सहयोगात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को झटका लगने के बाद ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति में बदलाव दिखाई दे रहा है। पहले जहां वे कई मुद्दों पर कांग्रेस से दूरी बनाकर चलती थीं, वहीं अब INDIA गठबंधन के भीतर उनकी भूमिका अधिक सक्रिय और समन्वयवादी नजर आ रही है। दूसरी ओर, TMC के भीतर कथित असंतोष और कुछ सांसदों के बगावती रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हुए हैं। यही कारण है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को मजबूत करने में अधिक रुचि दिखा रही हैं। INDIA गठबंधन की बैठक में कई क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस को भी संदेश दिया कि गठबंधन की सफलता के लिए बड़े दल को सहयोगी दलों के प्रति अधिक उदार रवैया अपनाना होगा। ममता बनर्जी का अपेक्षाकृत नरम रुख इसी बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो ममता बनर्जी के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, TMC को आंतरिक टूट-फूट से बचाना और दूसरी, राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना। इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ बेहतर तालमेल उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। Editor Shobha Bhati Post navigation पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक तेल बाजार पर मंडरा रहा खतरा, भारत भी रखे हुए है पैनी नजर