दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में समुद्री क्षेत्रों और रणनीतिक द्वीपों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी रुचि ने वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी। अब हिंद महासागर में स्थित एक और महत्वपूर्ण द्वीप अमेरिकी रणनीतिक चिंतन का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। यह द्वीप है Diego Garcia, जो हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और अमेरिकी सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। डिएगो गार्सिया भले ही भौगोलिक रूप से छोटा द्वीप हो, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी है। यह द्वीप British Indian Ocean Territory का हिस्सा है और यहां अमेरिका तथा ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा मौजूद है। हिंद महासागर के मध्य में स्थित होने के कारण यह एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य और लॉजिस्टिक केंद्र का काम करता है आखिर डिएगो गार्सिया इतना महत्वपूर्ण क्यों है? डिएगो गार्सिया की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह द्वीप दुनिया के उन क्षेत्रों के करीब स्थित है जहां वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े मुद्दे मौजूद हैं। मध्य पूर्व में ईरान का बढ़ता प्रभाव, लाल सागर क्षेत्र में अस्थिरता, अफ्रीका के पूर्वी तट की सुरक्षा चुनौतियां और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव अमेरिका के लिए चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में डिएगो गार्सिया अमेरिका को एक ऐसा सैन्य मंच उपलब्ध कराता है जहां से वह लंबी दूरी के बमवर्षक विमान, नौसैनिक जहाज और निगरानी प्रणालियों का संचालन कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी रक्षा रणनीति में इस द्वीप की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। चीन की बढ़ती ताकत और अमेरिकी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता का एक बड़ा कारण चीन है। पिछले एक दशक में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी आर्थिक और सामरिक उपस्थिति तेजी से बढ़ाई है। बंदरगाह परियोजनाओं, समुद्री व्यापार मार्गों और नौसैनिक गतिविधियों के जरिए बीजिंग इस क्षेत्र में प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका को आशंका है कि भविष्य में चीन हिंद महासागर में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत कर सकता है। ऐसे में डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण संतुलनकारी केंद्र बन जाता है। यहां से अमेरिकी सेना पूरे हिंद महासागर क्षेत्र पर निगरानी रख सकती है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई भी कर सकती है। मध्य पूर्व की राजनीति में भी अहम भूमिका डिएगो गार्सिया का उपयोग अतीत में कई सैन्य अभियानों के दौरान किया जा चुका है। अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी अभियानों के समय यह सैन्य अड्डा महत्वपूर्ण संचालन केंद्र के रूप में इस्तेमाल हुआ था। यहां से उड़ान भरने वाले विमानों ने कई मिशनों में हिस्सा लिया। आज भी मध्य पूर्व में जारी तनावों को देखते हुए यह अड्डा अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि क्षेत्र में किसी प्रकार का सैन्य संकट पैदा होता है, तो डिएगो गार्सिया अमेरिका को त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करता है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा हिंद महासागर विश्व व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले ऊर्जा संसाधन एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने में हिंद महासागर की केंद्रीय भूमिका है। अमेरिका लंबे समय से इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है। डिएगो गार्सिया इस उद्देश्य को पूरा करने में मदद करता है क्योंकि यहां से समुद्री गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा अभियानों का संचालन किया जा सकता है। ट्रंप की रणनीति में क्या खास? अमेरिकी राष्ट्रपति रह चुके Donald Trump हमेशा से राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने वाली नीति के समर्थक रहे हैं। उनकी विदेश नीति में रणनीतिक क्षेत्रों पर अमेरिकी प्रभाव बनाए रखने को विशेष महत्व दिया गया। ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताने के बाद ट्रंप प्रशासन के दौरान कई विश्लेषकों ने यह तर्क दिया था कि अमेरिका भविष्य में उन सभी स्थानों को अधिक महत्व देगा जो सैन्य, आर्थिक या भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। डिएगो गार्सिया इसी श्रेणी में आता है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेने की नई कोशिश कर रहा है, क्योंकि यहां पहले से ही अमेरिकी सैन्य उपस्थिति मौजूद है। लेकिन इसकी रणनीतिक उपयोगिता को और बढ़ाने की दिशा में रुचि लगातार बनी हुई है। भारत के लिए क्या मायने? भारत भी हिंद महासागर क्षेत्र की एक प्रमुख शक्ति है। ऐसे में डिएगो गार्सिया का महत्व भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति से भी जुड़ जाता है। भारत लंबे समय से हिंद महासागर को अपने रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखता है। एक तरफ अमेरिका और भारत के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत यह भी चाहता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बना रहे। इसलिए डिएगो गार्सिया की गतिविधियों पर नई दिल्ली की भी नजर रहती है। भविष्य की तस्वीर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हिंद महासागर वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन सकता है। चीन, अमेरिका, भारत और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां यहां अपने-अपने हितों को सुरक्षित करने में जुटी हैं। ऐसे माहौल में डिएगो गार्सिया की रणनीतिक भूमिका और भी बढ़ सकती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणालियां, लंबी दूरी की मिसाइलें, समुद्री निगरानी नेटवर्क और आधुनिक युद्ध तकनीकें इस द्वीप को भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों में और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती हैं Editor Shobha Bhati Post navigation पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक तेल बाजार पर मंडरा रहा खतरा, भारत भी रखे हुए है पैनी नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत की पैनी नजर, सरकार ने की शांति की अपील