दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जहां एक ओर AI ने काम को आसान, तेज और अधिक उत्पादक बनाया है, वहीं दूसरी ओर यह रोजगार के क्षेत्र में नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI के कारण लाखों पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को गिग इकोनॉमी यानी अस्थायी और फ्रीलांस आधारित काम की ओर रुख करना पड़ सकता है।

हाल के वर्षों में कंपनियां AI आधारित तकनीकों को तेजी से अपना रही हैं। ग्राहक सेवा, डेटा एंट्री, कंटेंट निर्माण, अकाउंटिंग और यहां तक कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कई ऐसे काम, जिन्हें पहले इंसान करते थे, अब मशीनों द्वारा कम समय और कम लागत में पूरे किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI का सबसे अधिक असर उन नौकरियों पर पड़ सकता है जो दोहराव वाले कार्यों पर आधारित हैं। बैंकिंग, बीमा, कॉल सेंटर और प्रशासनिक सेवाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नए कौशल सीखने की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि वे समय रहते खुद को अपस्किल नहीं करते, तो रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं।

इसी बीच गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। फूड डिलीवरी, कैब सर्विस, ऑनलाइन फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन और प्रोजेक्ट आधारित कामों में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में स्थायी नौकरी की जगह प्रोजेक्ट आधारित कार्यों का चलन और बढ़ सकता है। इससे कंपनियों को लचीलापन मिलेगा, लेकिन कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन सकती है।

हालांकि AI केवल नौकरियां खत्म ही नहीं कर रहा, बल्कि नए अवसर भी पैदा कर रहा है। AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल और AI ट्रेनर जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए विशेषज्ञ युवाओं को तकनीकी कौशल, डिजिटल स्किल्स और नई तकनीकों की समझ विकसित करने की सलाह दे रहे हैं।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकारों और कंपनियों को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो कर्मचारियों को बदलते समय के अनुसार प्रशिक्षित कर सकें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो रोजगार बाजार में असमानता बढ़ सकती है और बड़ी संख्या में लोग कम आय वाले गिग जॉब्स पर निर्भर हो सकते हैं।

कुल मिलाकर AI का बढ़ता प्रभाव भविष्य की कार्यशैली को पूरी तरह बदल सकता है। यह बदलाव अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। जो लोग नई तकनीकों के साथ खुद को ढाल लेंगे, उनके लिए नए रास्ते खुल सकते हैं, जबकि बदलाव को नजरअंदाज करने वालों के लिए रोजगार की राह कठिन हो सकती है

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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