साइबर अपराधियों के नए हथकंडे: बैंक खातों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, ऐसे रहें सुरक्षित भूमिका भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट और डिजिटल लेनदेन ने लोगों की जिंदगी को आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं। आए दिन बैंक खातों से पैसे गायब होने, फर्जी कॉल के जरिए ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं सामने आ रही हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अपराधी अब पहले से अधिक उन्नत तकनीकों और नए हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने और डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करने की जरूरत है। बढ़ रहा है साइबर फ्रॉड का खतरा पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर अपराधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साइबर अपराधी लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग डिटेल्स और मोबाइल नंबर हासिल कर उन्हें निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब ठग केवल फर्जी कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि AI, डीपफेक, फिशिंग वेबसाइट और नकली मोबाइल ऐप का उपयोग कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। साइबर अपराधियों के नए हथकंडे 1. फिशिंग लिंक का जाल ठग SMS, WhatsApp या ईमेल के जरिए फर्जी लिंक भेजते हैं। ये लिंक बैंक, सरकारी योजना या KYC अपडेट के नाम पर भेजे जाते हैं। जैसे ही यूजर लिंक पर क्लिक करता है, उसे नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है जहां उसकी बैंकिंग जानकारी चोरी कर ली जाती है। 2. फर्जी कस्टमर केयर कॉल अपराधी खुद को बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर कॉल करते हैं। वे खाते के बंद होने, KYC अपडेट या कार्ड ब्लॉक होने का डर दिखाकर OTP, ATM PIN और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। 3. स्क्रीन शेयरिंग ऐप फ्रॉड आजकल साइबर अपराधी AnyDesk, TeamViewer या अन्य रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर लोगों के मोबाइल और बैंकिंग ऐप तक पहुंच बना लेते हैं। एक बार एक्सेस मिलने के बाद वे खाते से पैसे निकाल सकते हैं। 4. QR कोड स्कैम QR कोड का इस्तेमाल अब धोखाधड़ी के लिए भी किया जा रहा है। अपराधी पैसे भेजने के बहाने QR कोड स्कैन करवाते हैं। कई लोग यह समझते हैं कि QR स्कैन करने से पैसा आएगा, जबकि वास्तव में उनके खाते से पैसा कट जाता है। 5. डीपफेक और AI आधारित फ्रॉड AI तकनीक के जरिए किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या वीडियो बनाकर लोगों को धोखा दिया जा रहा है। कई मामलों में परिवार के सदस्य या दोस्त बनकर तत्काल पैसे भेजने की मांग की जाती है। 6. नकली बैंकिंग ऐप साइबर अपराधी बैंकिंग ऐप जैसे दिखने वाले फर्जी ऐप बनाकर लोगों को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। इन ऐप्स के जरिए लॉगिन डिटेल्स और पासवर्ड चोरी किए जाते हैं। क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध? विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल जागरूकता की कमी साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार है। कई लोग जल्दबाजी में लिंक पर क्लिक कर देते हैं या बिना जांचे OTP साझा कर देते हैं। यही छोटी गलतियां बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बनती हैं। बैंक खाते को सुरक्षित रखने के उपाय ✅ OTP कभी साझा न करें बैंक या कोई भी सरकारी संस्था कभी OTP, PIN या पासवर्ड नहीं मांगती। ✅ संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें अनजान SMS, ईमेल या WhatsApp लिंक से दूर रहें। ✅ मजबूत पासवर्ड बनाएं बैंकिंग और UPI ऐप के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें। ✅ टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें जहां संभव हो, 2FA सुरक्षा सुविधा का उपयोग करें। ✅ केवल आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें ऐप डाउनलोड करते समय डेवलपर का नाम और रिव्यू अवश्य जांचें। ✅ बैंक अलर्ट चालू रखें SMS और ईमेल अलर्ट से हर ट्रांजैक्शन पर नजर रखें। ✅ सार्वजनिक Wi-Fi से बचें पब्लिक नेटवर्क पर बैंकिंग लेनदेन करने से बचें। फ्रॉड होने पर क्या करें? यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे तुरंत: बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए। कार्ड और नेट बैंकिंग को ब्लॉक करवाना चाहिए। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए। संबंधित बैंक शाखा को लिखित सूचना देनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। सरकार और बैंकों की पहल सरकार और बैंक लगातार साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चला रहे हैं। AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम, सुरक्षित भुगतान तंत्र और रियल-टाइम निगरानी जैसे उपायों को मजबूत किया जा रहा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी स्वयं यूजर की है। निष्कर्ष डिजिटल बैंकिंग ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर खतरों का दायरा भी बढ़ा है। साइबर अपराधी रोज नए तरीके खोज रहे हैं और बैंक खातों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखें और संदिग्ध गतिविधियों से सावधान रहें, तो अधिकांश साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation डीपफेक वीडियो का बढ़ता खतरा: आम लोगों के लिए सरकार और विशेषज्ञों की नई सलाह भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति: दोनों देशों ने दोहराई मजबूत आर्थिक साझेदारी की प्रतिबद्धता