डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठग भी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। खासकर बुजुर्गों और तकनीक की कम जानकारी रखने वाले लोगों को ठग आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में केवल एक गलत क्लिक या एक लिंक खोलने भर से बैंक खाते की जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है। इसीलिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक रहने और अपने माता-पिता तथा परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को ऐसे फ्रॉड के बारे में जानकारी देने की सलाह दे रहे हैं। 📱 कैसे काम करता है यह फ्रॉड? साइबर ठग अक्सर बैंक, सरकारी संस्था, कुरियर कंपनी, बिजली विभाग या किसी लोकप्रिय सेवा प्रदाता के नाम पर फर्जी संदेश भेजते हैं। इन संदेशों में लिखा होता है कि— आपका बैंक खाता बंद होने वाला है। केवाईसी (KYC) अपडेट करना जरूरी है। बिजली कनेक्शन कट सकता है। कोई पार्सल रुका हुआ है। लॉटरी या इनाम जीता है। संदेश में एक लिंक दिया जाता है और लोगों से उस पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। ⚠️ एक क्लिक से कैसे हो सकता है नुकसान? जैसे ही व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता है, उसे एक नकली वेबसाइट पर भेज दिया जाता है जो देखने में बिल्कुल असली वेबसाइट जैसी लगती है। वहां उससे मांगी जा सकती हैं— बैंक खाते की जानकारी डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर यूपीआई पिन ओटीपी इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड कुछ मामलों में लिंक पर क्लिक करने से फोन में हानिकारक ऐप भी डाउनलोड हो सकती है, जो फोन की जानकारी चुरा सकती है। 👴 बुजुर्ग सबसे ज्यादा क्यों बनते हैं शिकार? साइबर अपराधी जानते हैं कि कई बुजुर्ग डिजिटल तकनीक के बारे में सीमित जानकारी रखते हैं। इसलिए वे उन्हें डराकर या भ्रमित करके जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं। उदाहरण के लिए— “अभी KYC अपडेट नहीं किया तो खाता बंद हो जाएगा” “OTP तुरंत बताइए, नहीं तो सेवा बंद हो जाएगी” “आपका बैंक खाता ब्लॉक होने वाला है” घबराहट में लोग बिना जांच-पड़ताल किए जानकारी साझा कर देते हैं। 🔒 इन बातों का रखें विशेष ध्यान अपने माता-पिता और परिवार के लोगों को निम्नलिखित बातें जरूर बताएं— ❌ कभी भी इन चीजों को साझा न करें: OTP UPI PIN ATM PIN CVV नंबर नेट बैंकिंग पासवर्ड ❌ किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें यदि कोई बैंक या संस्था संदेश भेजती है, तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से जानकारी जांचें। ❌ स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें ठग कई बार AnyDesk, TeamViewer या अन्य रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाने की कोशिश करते हैं। ❌ जल्दबाजी में निर्णय न लें यदि कोई कॉल करके तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाए, तो पहले परिवार के किसी सदस्य या बैंक से पुष्टि करें। 🏦 बैंक कभी नहीं मांगता ये जानकारी याद रखें— कोई भी बैंक, आरबीआई या सरकारी संस्था फोन, एसएमएस या ईमेल पर कभी भी OTP, PIN या पासवर्ड नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांग रहा है, तो वह संभवतः ठग हो सकता है। 🚔 फ्रॉड होने पर क्या करें? यदि गलती से किसी ने जानकारी साझा कर दी हो या धोखाधड़ी का संदेह हो— तुरंत बैंक को सूचित करें। कार्ड और यूपीआई सेवाएं ब्लॉक करवाएं। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। 📢 जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। जितनी अधिक जानकारी लोगों को होगी, उतना ही कठिन होगा कि ठग उन्हें धोखा दे सकें। अपने माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों को समय-समय पर ऐसे फ्रॉड के बारे में जानकारी दें और उन्हें सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation 🔍 सोनम-मुस्कान से सिया तक, रिश्तों में बढ़ती हिंसा क्यों? क्या संबंध खत्म करना हत्या से कठिन हो गया है? आधार मान्य नहीं, पासपोर्ट से पहचान नहीं, फिर भारतीयता का सबूत क्या? आखिर बाकी दस्तावेजों की जरूरत क्यों पड़ती है?