कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया तेज होने के साथ एक नया और दिलचस्प रुझान सामने आया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे लोग स्वयं आगे आकर अपनी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन करवा रहे हैं, जिन पर बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का संदेह है। अधिकारियों का दावा है कि प्रतिदिन करीब 200 से 300 लोगों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इस बीच भारत-बांग्लादेश सीमा पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच सतर्कता बढ़ने से तनावपूर्ण माहौल भी बना हुआ है। सत्यापन अभियान में तेजी हाल के महीनों में केंद्र और राज्य एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत संदिग्ध लोगों के दस्तावेज, निवास संबंधी प्रमाण और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं या जिनकी नागरिकता को लेकर संदेह है, उन्हें सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। रोजाना 200-300 मामलों की जांच अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में प्रतिदिन 200 से 300 लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसमें स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। सत्यापन के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों की जांच की जाती है। यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेजों में विसंगति पाई जाती है, तो उससे विस्तृत पूछताछ की जाती है। कई मामलों में पड़ोसियों और स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाई जाती है ताकि संबंधित व्यक्ति की वास्तविक पहचान का पता लगाया जा सके। बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे कुछ लोग सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं जिन्होंने स्वीकार किया है कि वे मूल रूप से बांग्लादेश के निवासी हैं और वर्षों पहले रोजगार या अन्य कारणों से भारत आए थे। इनमें से कुछ ने स्वेच्छा से अपने देश लौटने की इच्छा भी जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती निगरानी और कानूनी कार्रवाई के डर से कई लोग अब स्वयं सामने आने को मजबूर हो रहे हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी और किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं की जाएगी। सीमा पर बढ़ी चौकसी भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें पश्चिम बंगाल का हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। हाल के दिनों में सीमा क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। सीमा पर लगे निगरानी उपकरणों और कैमरों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर, बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसियां भी अपने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा रही हैं। यही कारण है कि सीमा के दोनों ओर तनाव और चौकसी का माहौल देखने को मिल रहा है। राजनीतिक बहस भी तेज अवैध प्रवासियों का मुद्दा लंबे समय से पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय रहा है। भाजपा लगातार राज्य सरकार पर अवैध घुसपैठ रोकने में विफल रहने का आरोप लगाती रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर इस्तेमाल किया जाता है। सत्यापन अभियान के तेज होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ गई है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन के लिए अवैध प्रवास पर नियंत्रण आवश्यक है। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों का मानना है कि किसी भी कार्रवाई में मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा पालन होना चाहिए। स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की प्रतिक्रिया भी मिश्रित है। कुछ लोग प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं और इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों को चिंता है कि जांच के दौरान वैध नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सत्यापन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी न झेलनी पड़े Editor Shobha Bhati Post navigation कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में नाबालिग से कथित यौन शोषण, डॉक्टर गिरफ्तार; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल अक्षरधाम मंदिर और दिल्ली का ‘ओ’ ज़ोन: यमुना फ्लडप्लेन में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन