दिल्ली में एक बार फिर अवैध कॉलोनियों, यमुना बाढ़ क्षेत्र और ज़ोन-ओ को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। राजधानी की लगभग 94 ऐसी कॉलोनियां, जो यमुना के किनारे और उसके संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र में विकसित हुई हैं, वहां रहने वाले करीब 15 लाख लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासनिक कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की संभावित मुहिम की खबरों ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनके घर सुरक्षित रहेंगे या फिर बुलडोज़र की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के मास्टर प्लान में यमुना के आसपास के क्षेत्र को विशेष श्रेणी में रखा गया है, जिसे ज़ोन-ओ कहा जाता है। यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यमुना नदी के दोनों किनारों पर फैले लगभग 22 किलोमीटर के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर कई प्रकार की पाबंदियां लागू हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण न केवल नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करता है बल्कि भविष्य में बाढ़ और पर्यावरणीय संकट का कारण भी बन सकता है। पिछले कई दशकों में यमुना के आसपास बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियां विकसित हो गईं। इनमें हजारों परिवारों ने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर घर बनाए हैं। इनमें से अधिकांश लोग निम्न और मध्यम आय वर्ग से आते हैं, जिनके लिए घर केवल एक संपत्ति नहीं बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। ऐसे में जब भी अतिक्रमण हटाने या अवैध निर्माण पर कार्रवाई की चर्चा होती है, लोगों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल बन जाता है। प्रशासन का कहना है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करना पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। अदालतें भी समय-समय पर नदी के प्राकृतिक क्षेत्र को संरक्षित रखने पर जोर देती रही हैं। दूसरी ओर, स्थानीय निवासी यह तर्क देते हैं कि कई कॉलोनियां वर्षों पुरानी हैं और वहां बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने लंबे समय तक इन बस्तियों को अस्तित्व में रहने दिया है, तो अब अचानक विस्थापन का खतरा लाखों लोगों के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान केवल बुलडोज़र कार्रवाई से नहीं निकल सकता। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण और मानवीय हितों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। जहां नदी और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, वहीं प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। फिलहाल दिल्ली की 94 अवैध कॉलोनियों और यमुना के 22 किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोग अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि इस मुद्दे ने राजधानी की राजनीति, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation यूपी में बनेगा नया हाईस्पीड कॉरिडोर, गंगा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से होगा लिंक, MP-बिहार से दिल्ली तक जुड़ेगा चंडीगढ़ में खौफनाक वारदात: मेडिकल स्टोर में घुसे हमलावर ने की दनादन फायरिंग, रोंगटे खड़े कर देगा