भारत ए और श्रीलंका ए के बीच डंबुला में खेले गए ट्राई-सीरीज मुकाबले में एक बेहद दुर्लभ घटना देखने को मिली, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों को हैरान कर दिया। मैच के दौरान भारतीय बल्लेबाज विप्राज निगम की एक गलती के कारण पूरी टीम को 10 रन की पेनल्टी झेलनी पड़ी। इसका असर इतना बड़ा था कि श्रीलंका ए की टीम ने अपनी पारी शुरू होने से पहले ही स्कोरबोर्ड पर 10 रन जोड़ लिए थे।

भारत ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.2 ओवर में 265 रन बनाए। टीम एक समय मुश्किल में थी, लेकिन विप्राज निगम और सूर्यांश शेडगे ने शानदार साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। विप्राज ने 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, लेकिन उनकी एक तकनीकी गलती मैच की सबसे बड़ी चर्चा बन गई।

दरअसल, बल्लेबाजी के दौरान विप्राज निगम दो बार पिच के “प्रोटेक्टेड एरिया” यानी संरक्षित हिस्से पर दौड़ते हुए पाए गए। क्रिकेट के नियमों के अनुसार बल्लेबाजों को पिच के बीच वाले हिस्से पर दौड़ने से बचना होता है क्योंकि इससे पिच को नुकसान पहुंच सकता है। पिच की सतह खराब होने पर गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

मैच के 35वें ओवर में अंपायरों ने विप्राज को पहली बार इस गलती के लिए चेतावनी दी। इसके बावजूद कुछ ओवर बाद उन्होंने फिर वही गलती दोहरा दी। नियमों के मुताबिक चेतावनी के बाद दोबारा ऐसा होने पर बल्लेबाजी कर रही टीम पर 5 रन की पेनल्टी लगाई जाती है। विप्राज ने यह गलती दो बार की, जिसके चलते भारत ए के खाते से कुल 10 रन काट लिए गए और ये रन श्रीलंका ए को दे दिए गए।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जब श्रीलंका ए लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो उसके स्कोरबोर्ड पर पहली गेंद फेंके जाने से पहले ही 10/0 का स्कोर दर्ज था। क्रिकेट में इस तरह की घटना बेहद कम देखने को मिलती है, इसलिए यह मामला तुरंत चर्चा का विषय बन गया।

हालांकि विप्राज निगम ने बल्ले से शानदार योगदान दिया और टीम को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उनकी यह चूक भारतीय टीम के लिए महंगी साबित हुई। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को तकनीकी नियमों की बेहतर जानकारी होना जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी पूरे मैच का रुख बदल सकती है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि क्रिकेट सिर्फ रन और विकेट का खेल नहीं है, बल्कि नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विप्राज निगम की यह भूल आने वाले समय में युवा खिलाड़ियों के लिए एक सीख बन सकती है कि मैदान पर हर नियम का सम्मान करना कितना जरूरी है।

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