ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित दनकौर क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक विरोध का रूप ले चुका है। अपनी छह महीने की मासूम बेटी से मिलने की मांग को लेकर एक महिला ने अपने ससुराल के बाहर धरना शुरू कर दिया है। महिला का आरोप है कि उसे पिछले छह महीनों से अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा और बार-बार कोशिश करने के बावजूद उसे बच्ची से दूर रखा गया है।

यह मामला अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। महिला का कहना है कि जब उसे कोई रास्ता नहीं मिला तो उसने अपनी बच्ची से मिलने की मांग को लेकर ससुराल के बाहर शांतिपूर्ण धरना शुरू करने का फैसला किया।

क्या है पूरा मामला?

महिला का आरोप है कि पारिवारिक विवाद के चलते वह पिछले छह महीनों से अपनी बेटी से अलग रह रही है। उसका कहना है कि उसने कई बार परिवार के लोगों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे निराशा हाथ लगी। महिला का दावा है कि उसे बच्ची से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही।

दूसरी ओर, इस मामले में ससुराल पक्ष का पक्ष सामने आना और प्रशासनिक जांच पूरी होना अभी बाकी है। इसलिए पूरे विवाद की सच्चाई आधिकारिक जांच और दोनों पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ससुराल के बाहर धरने पर बैठी महिला

अपनी मांग को लेकर महिला ससुराल के बाहर धरने पर बैठ गई। उसने कहा कि जब तक उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जाएगा, तब तक वह अपना विरोध जारी रखेगी। धरने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

महिला ने प्रशासन से भी हस्तक्षेप करने और उसे न्याय दिलाने की मांग की है।

स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी

धरने की सूचना फैलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकालने की बात कही, जबकि कुछ लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग की।

हालांकि, किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

पुलिस को दी गई सूचना

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत बनाए रखने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने यह भी कहा कि प्राथमिकता किसी भी तरह कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशने की होगी।

बच्चे के हित को बताया सबसे अहम

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत और संबंधित प्राधिकरण हमेशा बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को प्राथमिकता देते हैं। यदि माता-पिता या परिवार के बीच विवाद हो, तब भी बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और मानसिक विकास सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

यदि मामला न्यायालय तक पहुंचता है, तो उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर मुलाकात (Visitation Rights) या अभिरक्षा (Custody) से संबंधित निर्णय लिया जा सकता है।

परिवारों में बढ़ रहे ऐसे विवाद

विशेषज्ञों के अनुसार पारिवारिक विवादों में अक्सर सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होते हैं। ऐसे मामलों में बातचीत, पारिवारिक परामर्श (Family Counseling) और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालना अधिक उचित माना जाता है।

प्रशासन की भूमिका पर नजर

फिलहाल पूरे मामले पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की नजर बनी हुई है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान नहीं निकाल पाते हैं, तो मामला न्यायालय या संबंधित कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच सकता है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

 

 

 

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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