टोक्यो: जापान एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से दहल उठा। देश के कई इलाकों में धरती कांपने के बाद लोगों में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने तुरंत हालात का जायजा लेना शुरू कर दिया है। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन सतर्कता बरत रहा है।

जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे अधिक भूकंप आते हैं। प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां अक्सर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। यही कारण है कि जापान ने आपदा प्रबंधन और भूकंप से बचाव के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया है।

अचानक कांपी धरती, लोग घरों से बाहर निकले

भूकंप के झटके महसूस होते ही कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें इमारतों को हिलते और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भागते देखा गया।

कई क्षेत्रों में ट्रेन सेवाओं को एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए रोक दिया गया। प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की।

आपदा एजेंसियां अलर्ट पर

जापान की मौसम एजेंसी और आपदा प्रबंधन विभाग ने भूकंप के बाद तुरंत स्थिति की निगरानी शुरू कर दी। विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि भूकंप का केंद्र कहां था और इसकी तीव्रता कितनी रही।

अधिकारियों ने कहा कि आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले छोटे झटकों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

सुनामी की आशंका पर नजर

जापान में जब भी समुद्र के नीचे भूकंप आता है, तो सुनामी की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, इस भूकंप के बाद सुनामी को लेकर तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया, फिर भी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर तुरंत चेतावनी जारी करने की तैयारी कर रहा है।

जापान में क्यों आते हैं इतने भूकंप?

जापान पृथ्वी की कई टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है। इन प्लेटों की हलचल के कारण यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। हर साल जापान में हजारों छोटे-बड़े भूकंप दर्ज किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश भूकंप हल्के होते हैं, लेकिन कभी-कभी तेज तीव्रता के भूकंप बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। वर्ष 2011 में आए भीषण भूकंप और सुनामी ने जापान को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी।

भूकंप से निपटने में दुनिया के लिए उदाहरण है जापान

जापान ने भूकंप से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। देश में भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण किया जाता है और लोगों को नियमित रूप से आपदा से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाता है।

स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है, ताकि आपात स्थिति में लोग घबराएं नहीं और सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकें।

लोगों में दहशत, लेकिन संयम भी

हालांकि भूकंप के झटकों ने लोगों को डरा दिया, लेकिन जापान के नागरिकों ने एक बार फिर संयम और अनुशासन का परिचय दिया। लोगों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन किया और बिना अफरा-तफरी के सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।

कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने आपातकालीन किट तैयार रखे और स्थानीय प्रशासन से जारी निर्देशों पर नजर बनाए रखी।

सरकार ने की अपील

जापानी सरकार ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही प्रशासन ने कहा है कि यदि कहीं नुकसान की सूचना मिलती है, तो राहत और बचाव दल तुरंत कार्रवाई करेंगे।

सरकार ने यह भी कहा कि देश की आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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