नई दिल्ली: एक फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी किस तरह नारकीय हालात में बदल गई थी, इसका दर्दनाक खुलासा एक युवक शिवम ने किया है। शिवम ने बताया कि फैक्टरी के अंदर काम करने वालों को इंसानों की तरह नहीं, बल्कि कैदियों की तरह रखा जाता था। उन्हें मुश्किल से डेढ़ घंटे की नींद मिलती थी, हर वक्त खूंखार पिटबुल कुत्तों का डर बना रहता था और विरोध करने वालों के साथ कथित तौर पर बर्बर व्यवहार किया जाता था।

शिवम की आपबीती ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस अब मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फैक्टरी से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।

“सिर्फ डेढ़ घंटे सोने की इजाजत”

शिवम ने बताया कि फैक्टरी में काम करने वालों को दिन-रात काम कराया जाता था। उन्हें आराम के लिए मुश्किल से डेढ़ घंटे का समय दिया जाता था। बाकी समय उन्हें लगातार काम करना पड़ता था।

उसने दावा किया कि कई मजदूर थकान और बीमारी के बावजूद काम करने को मजबूर थे। यदि कोई काम करने से मना करता या विरोध करता, तो उसे धमकाया जाता था।

खूंखार पिटबुल का डर

शिवम के अनुसार, फैक्टरी परिसर में कई पिटबुल कुत्ते रखे गए थे। मजदूरों में इन कुत्तों का इतना डर था कि कोई भी वहां से भागने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

उसने बताया कि कुत्तों का इस्तेमाल कथित तौर पर मजदूरों को डराने और नियंत्रण में रखने के लिए किया जाता था। हालांकि, इन दावों की पुलिस स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।

“बोरों में फेंकी जाती थीं लाशें”

शिवम का सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि फैक्टरी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर शवों को बोरों में भरकर ठिकाने लगाने की कोशिश की जाती थी। उसने कहा कि कुछ मजदूर अचानक गायब हो जाते थे और उनके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं मिलती थी।

इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन हर पहलू की जांच में जुट गए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि यदि ऐसे दावों के समर्थन में सबूत मिलते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फैक्टरी में अमानवीय हालात?

स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्टरी के बारे में पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आ चुकी थीं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वहां काम करने वाले मजदूरों से अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जाता था।

हालांकि, फैक्टरी प्रबंधन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पुलिस ने शुरू की गहन जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि—

  • फैक्टरी परिसर की जांच की जा रही है।
  • कर्मचारियों और मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
  • सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
  • शिवम द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मामले के सामने आने के बाद कई सामाजिक और मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि मजदूरों के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर देश में मजदूरों की सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त निगरानी और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है।

प्रशासन का बयान

स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील की है।

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *