ब्रिटेन सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर कड़े नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। बढ़ते डिजिटल प्रभाव, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दों को देखते हुए सरकार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाखों बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। हालांकि इसके साथ ही साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, गलत जानकारी, हानिकारक सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग बच्चों के आत्मविश्वास, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। ब्रिटेन सरकार का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन (Age Verification) की मजबूत व्यवस्था लागू करनी पड़ सकती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्धारित आयु से कम उम्र के बच्चे बिना अनुमति या उचित निगरानी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग न कर सकें। सरकार का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया बच्चों के लिए अवसरों के साथ-साथ कई जोखिम भी लेकर आते हैं। कई रिपोर्टों में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया पर लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले बच्चों में चिंता, तनाव, अवसाद और आत्मसम्मान से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में नई नीतियों पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर अभिभावकों की राय भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई माता-पिता इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और उनका मानना है कि इससे बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने में मदद मिलेगी। वहीं कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय जागरूकता और डिजिटल शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। सोशल मीडिया कंपनियों पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है। यदि नए नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपनी नीतियों और तकनीकी व्यवस्थाओं में बदलाव करना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के उपयोगकर्ता प्लेटफॉर्म पर आसानी से खाता न बना सकें और बच्चों के लिए उपलब्ध सामग्री सुरक्षित एवं उपयुक्त हो। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों को पूरी तरह इंटरनेट से दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसलिए सरकारें और तकनीकी कंपनियां मिलकर ऐसे उपाय खोजने की कोशिश कर रही हैं, जिससे बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के लाभ मिल सकें और वे उसके खतरों से भी सुरक्षित रह सकें। ब्रिटेन का यह कदम अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। दुनिया के कई देश पहले ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए कानून और नियम लागू कर चुके हैं। यदि ब्रिटेन में यह नीति सफल होती है, तो अन्य देश भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं। कुल मिलाकर, 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध की तैयारी ब्रिटेन सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र विकास को प्राथमिकता देना है। आने वाले समय में यह फैसला डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया के भविष्य पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation NCERT का यू-टर्न: ‘डांसिंग गर्ल’ चित्र विवाद के बाद बदला फैसला, शिक्षा जगत में फिर शुरू हुई बहस नीरज चोपड़ा पर टिकी देश की उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय स्टार से बड़े प्रदर्शन की आस