नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून के बीच फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरान फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संभावित बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और वीजा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

जानकारों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में जी-7 सम्मेलन के दौरान होने वाली संभावित बैठक दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

सूत्रों के मुताबिक एच-1बी वीजा, व्यापार शुल्क और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दे बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। भारत लंबे समय से अपने पेशेवरों और छात्रों के हितों से जुड़े मामलों को अमेरिका के सामने उठाता रहा है। वहीं दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।

विदेश नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद की भूमिका और भी बढ़ जाती है।

अब सभी की नजरें जी-7 सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां होने वाली संभावित मोदी-ट्रंप मुलाकात से कई बड़े संदेश निकल सकते हैं। यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 

 

 

 

 

* रिपोर्टर * ( श्रीमती शोभा भाटी )

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