हरियाणवी संगीत और डांस की दुनिया का चर्चित नाम सपना चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया गाना या मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा एक गंभीर मामला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सपना चौधरी ने अपने पति यशवीर साहू पर घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद दिल्ली की द्वारका महिला कोर्ट ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सपना चौधरी ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि शादी के बाद से उन्हें लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि घरेलू हिंसा और तनावपूर्ण माहौल के कारण उन्हें अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ ससुराल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। सपना ने अदालत को बताया कि इस स्थिति का असर न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर पड़ा, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर कामकाज पर भी पड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सपना चौधरी को अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत ने यशवीर साहू को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वे सपना चौधरी से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें सपना के घर, कार्यालय या किसी फिल्म प्रीमियर और सार्वजनिक कार्यक्रम स्थल पर जाने से भी रोक दिया है। अदालत ने मामले में यशवीर साहू को समन जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 25 जुलाई निर्धारित की है। कोर्ट का यह आदेश फिलहाल अस्थायी है और अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सपना चौधरी हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक लोकप्रिय कलाकार के रूप में जानी जाती हैं। उनके गाने और स्टेज परफॉर्मेंस लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। टीवी रियलिटी शो “बिग बॉस” में हिस्सा लेने के बाद उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ी थी। ऐसे में उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस मामले में अभी तक यशवीर साहू की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कानूनी प्रक्रिया जारी है और मामले की सच्चाई अदालत में प्रस्तुत सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर तय होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ित पक्ष को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण देने के लिए विशेष कानून मौजूद हैं, जिनके तहत अदालतें तत्काल राहत और सुरक्षा आदेश जारी कर सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें 25 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि घरेलू हिंसा किसी भी वर्ग या पेशे से जुड़े व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और ऐसे मामलों में कानूनी सहायता लेना एक महत्वपूर्ण कदम है। * रिपोर्टर * ( श्रीमती शोभा भाटी ) Post navigation सुभासपा के 44 सीटों पर दावेदार तय, भाजपा की 8 और निषाद पार्टी की 2 सीटों पर भी दावा*