थिम्फू/सिलीगुड़ी। भूटान में आए भूकंप के तेज झटकों ने देर रात लोगों को दहशत में डाल दिया। भूकंप का असर केवल भूटान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके झटके भारत के उत्तर बंगाल के कई जिलों में भी महसूस किए गए। अचानक धरती हिलने से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए और काफी देर तक खुले स्थानों पर खड़े रहे। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन भूकंप के झटकों ने लोगों के बीच भय का माहौल जरूर पैदा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात अचानक जमीन में कंपन महसूस हुआ। कई स्थानों पर पंखे और घरों में रखे सामान हिलने लगे। कुछ सेकंड तक चले इस कंपन ने लोगों को चौंका दिया। जैसे ही लोगों को भूकंप का एहसास हुआ, वे तुरंत घरों से बाहर निकल आए। कई परिवार पूरी रात सतर्क रहे और आफ्टरशॉक की आशंका के कारण घरों में लौटने से बचते रहे। भूटान के विभिन्न हिस्सों में भूकंप का केंद्र होने के कारण वहां झटकों की तीव्रता अधिक महसूस की गई। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के बाद सभी महत्वपूर्ण भवनों और सार्वजनिक संरचनाओं की जांच की जा रही है ताकि किसी प्रकार की क्षति का आकलन किया जा सके। भारत में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार और सिलीगुड़ी समेत कई क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। लोगों ने बताया कि रात के समय अचानक बिस्तर और फर्नीचर हिलने लगे, जिससे उन्हें भूकंप का अंदेशा हुआ। कुछ जगहों पर लोग अपने परिजनों को लेकर तुरंत बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। सिलीगुड़ी के कई इलाकों में लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भूकंप के झटकों की जानकारी साझा की। कुछ लोगों ने बताया कि कंपन कुछ सेकंड तक महसूस हुआ, जबकि अन्य ने कहा कि झटके इतने तेज थे कि उन्हें नींद से उठना पड़ा। हालांकि किसी इमारत के गिरने या गंभीर नुकसान की खबर नहीं मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। भारत, भूटान और नेपाल का बड़ा हिस्सा भूकंप के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। इसी वजह से यहां रहने वाले लोगों को हमेशा सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन के नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। भूकंप के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि यदि आफ्टरशॉक महसूस हो तो घबराने की बजाय सुरक्षित स्थान पर जाएं। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तुरंत सूचना दें। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भूकंप आने पर लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए और मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे शरण लेना सबसे सुरक्षित उपायों में से एक माना जाता है। खुले स्थान में रहने वाले लोगों को बिजली के खंभों, पेड़ों और पुरानी इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है। उत्तर बंगाल के कई जिलों में प्रशासन ने स्थिति की समीक्षा की और स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और आपदा राहत दलों को भी तैयार रहने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी संभावित आपात स्थिति का तुरंत सामना किया जा सके। भूकंप के झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल देखने को मिला, लेकिन राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील कर रहा है। भूटान और उत्तर बंगाल में महसूस किए गए इन झटकों ने एक बार फिर याद दिलाया है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और आपदा से निपटने की तैयारी ही किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। आने वाले दिनों में विशेषज्ञ भूकंप की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे और आवश्यक होने पर संबंधित एजेंसियों को दिशा-निर्देश जारी करेंगे। Editor Shobha Bhati Post navigation रजौन में तीन अलग-अलग गांवों में तीन मौतें, दहेज और जमीन विवाद में हत्या के आरोप से मचा हड़कंप दिल्ली में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, सरकार को घेरने की बनी रणनीति