उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर राम मंदिर निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। अजय राय ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन और शिलापूजन अभियान के दौरान लोगों से बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया और मंदिर निर्माण से जुड़े मामलों में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में करीब 1,400 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। अजय राय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने वर्षों तक राम मंदिर के नाम पर लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल किया और शिलापूजन कार्यक्रमों के जरिए देशभर से चंदा इकट्ठा किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा नेताओं ने अजय राय के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बयानबाजी बताया है। भाजपा का कहना है कि राम मंदिर निर्माण का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है और इसके लिए गठित ट्रस्ट नियमित रूप से सभी वित्तीय गतिविधियों का लेखा-जोखा रखता है। भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से राम मंदिर के मुद्दे पर दोहरी राजनीति करती रही है। उनका कहना है कि जब मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है और करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, तब ऐसे आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। भाजपा ने कांग्रेस से आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर बयानबाजी तेज हो सकती है। राम मंदिर देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण विषय रहा है और इससे जुड़े किसी भी बयान पर राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। वहीं, अजय राय के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनके आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसे राजनीतिक बयान मान रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण के इतने बड़े आरोप लगाना उचित नहीं है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान जारी है। कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है, जबकि भाजपा इन्हें पूरी तरह खारिज कर रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, खासकर यदि इस मामले में कोई नया तथ्य या दस्तावेज सामने आता है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत किए जाएंगे या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहेगा। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation प्रयागराज में ट्रिपल मर्डर से सनसनी: एक ही परिवार के तीन बुजुर्गों की निर्मम हत्या, इलाके में दहशत 🏫 यूपी में बढ़ी गर्मी की छुट्टियां: अब 24 जून तक बंद रहेंगे प्राइमरी स्कूल, योगी सरकार का बड़ा फैसला