राजस्थान में भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने राज्य में मानसून की एंट्री को लेकर अहम जानकारी दी है। दूसरी ओर, कोटा शहर में प्रशासन ने बारिश से पहले बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। शहर की करीब 100 जर्जर इमारतों को चिह्नित किया गया है, जिन पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है। इन इमारतों की सूची में ऐतिहासिक झाला हाउस का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। राजस्थान में कब पहुंचेगा मानसून? भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही राजस्थान के कई हिस्सों में दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर और आसपास के जिलों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है। मानसून की एंट्री के बाद राज्य के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। गर्मी और उमस से परेशान लोग पिछले कई दिनों से राजस्थान के अधिकांश जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। कई शहरों में दिन के समय तेज धूप और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को राहत मिलेगी। किसानों के लिए भी यह बारिश काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर काफी हद तक निर्भर करती है। कोटा में जर्जर इमारतों पर प्रशासन सख्त मानसून की दस्तक से पहले कोटा नगर निगम और जिला प्रशासन ने शहर की पुरानी और खतरनाक इमारतों को लेकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। प्रशासन ने करीब 100 ऐसी इमारतों की पहचान की है, जो जर्जर हालत में हैं और बारिश के दौरान कभी भी गिर सकती हैं। इन इमारतों के कारण लोगों की जान को खतरा हो सकता है। इसी वजह से प्रशासन ने उन्हें खाली कराने और जरूरत पड़ने पर बुलडोजर से ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। झाला हाउस भी सूची में शामिल चर्चा का विषय यह है कि चिह्नित इमारतों की सूची में कोटा का प्रसिद्ध झाला हाउस भी शामिल है। यह भवन ऐतिहासिक महत्व रखता है और लंबे समय से शहर की पहचान का हिस्सा माना जाता रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि किसी भी इमारत के ऐतिहासिक महत्व से अधिक जरूरी लोगों की सुरक्षा है। यदि कोई भवन अत्यधिक जर्जर है और उसके गिरने का खतरा है, तो उसके संबंध में विशेषज्ञों की राय लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा। बारिश में बढ़ जाता है खतरा हर वर्ष मानसून के दौरान कई पुराने मकान और भवन गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। जर्जर इमारतें तेज बारिश और नमी के कारण और कमजोर हो जाती हैं, जिससे बड़े हादसों की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि किसी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके। भवन मालिकों को नोटिस नगर निगम ने कई भवन मालिकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। उन्हें इमारतों की मरम्मत कराने, खाली कराने या स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रशासन अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा और उसका खर्च संबंधित मालिकों से वसूला जा सकता है। स्थानीय लोगों में चिंता जिन क्षेत्रों में ये जर्जर इमारतें स्थित हैं, वहां रहने वाले लोगों में चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान इन इमारतों के गिरने का खतरा बना रहता है। कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जबकि कुछ लोगों ने ऐतिहासिक इमारतों को बचाने की मांग भी की है। किसानों के लिए राहत की उम्मीद मानसून की दस्तक से राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य के कई हिस्सों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खरीफ फसलों की बुवाई शुरू की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार मानसून सामान्य रहता है, तो कृषि उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन की तैयारी कोटा प्रशासन ने बारिश के मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी अलर्ट पर रखा है। जलभराव, पेड़ों के गिरने और जर्जर भवनों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए विशेष टीमें तैयार की जा रही हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation वाहनों की सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर चर्चा, एयरबैग सुरक्षा मामले ने बढ़ाई चिंता हाथ में हथकड़ी लगाई, पैदल पूरे गांव में घुमाया… लेकिन महादेव की हंसी ने ‘फेल’ कर दिया पुलिस का प्लान!