गाजियाबाद, 27 जून 2026: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस युवक को परिवार ने मृत मान लिया था, उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया और तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर ली गई। लेकिन तेरहवीं के कुछ दिन बाद वही बेटा अचानक जिंदा घर लौट आया। बेटे को सामने देखकर परिवार के होश उड़ गए और घर में खुशी के साथ-साथ हैरानी का माहौल बन गया।

यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले ने पुलिस और प्रशासन के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था।

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?

जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के एक युवक कुछ दिनों पहले अचानक लापता हो गया था। परिवार ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इसी बीच पुलिस को एक अज्ञात शव मिला।

शव की हालत काफी खराब थी, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। पुलिस ने परिवार को बुलाकर शव की पहचान करने को कहा। मां ने शव की कद-काठी और कुछ शारीरिक बनावट के आधार पर उसे अपने बेटे का शव मान लिया।

इसके बाद परिवार ने शव को स्वीकार कर लिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया।

तेरहवीं भी हो गई पूरी

परिजनों ने बेटे की मौत मानकर सभी धार्मिक रस्में पूरी कीं। तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया गया, रिश्तेदार और परिचित भी शोक प्रकट करने पहुंचे।

परिवार इस दुख से उबरने की कोशिश ही कर रहा था कि अचानक एक दिन दरवाजे पर दस्तक हुई। जब परिवार ने दरवाजा खोला, तो सामने वही युवक खड़ा था, जिसे मृत मान लिया गया था।

बेटे को देखकर मां हुई भावुक

अपने बेटे को जिंदा देखकर मां की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। परिवार के अन्य सदस्य भी कुछ देर तक समझ ही नहीं पाए कि आखिर यह कैसे संभव हो गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, घर में पहले तो सभी लोग डर और हैरानी में थे, लेकिन बाद में जब सच्चाई सामने आई तो खुशी का माहौल बन गया।

युवक ने क्या बताया?

युवक ने परिवार को बताया कि वह किसी काम से घर से बाहर गया था और कुछ परिस्थितियों के कारण संपर्क नहीं कर सका। इस दौरान उसका मोबाइल भी बंद था, जिससे परिवार को उसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवक इतने दिनों तक कहां था और उसने परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया।

सबसे बड़ा सवाल – आखिर वह शव किसका था?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शव को परिवार ने अपने बेटे का समझकर अंतिम संस्कार किया, वह वास्तव में किस व्यक्ति का था।

पुलिस अब उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करने में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की दोबारा जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर डीएनए परीक्षण का भी सहारा लिया जा सकता है।

पुलिस पर भी उठे सवाल

घटना सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि केवल कद-काठी के आधार पर शव की पहचान करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में डीएनए जांच, फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की गलती न हो।

इलाके में चर्चा का विषय बना मामला

यह अनोखी घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कई लोग इसे चमत्कार बता रहे हैं, तो कई लोग पुलिस जांच और शव पहचान प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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