अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक महत्वपूर्ण घटना को लेकर वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। चन्द्रमा की सतह से एक मानव-निर्मित अंतरिक्ष यान के टकराने की योजना के कारण ऐसा टक्कर विस्फोट होगा जिससे लगभग 30 मीटर तक का गड्ढा (क्रेटर) बन सकता है। यह घटना चन्द्रमा की सतह पर होने वाली एक नियंत्रित वैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, और वैज्ञानिकों के अनुसार इसका उद्देश्य चन्द्रमा की मिट्टी, धूल और आंतरिक संरचना का अध्ययन करना है। हालांकि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और सनसनीखेज दावों में इसे “भयंकर विस्फोट” या “तबाही का नजारा” बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह कोई प्राकृतिक विनाशकारी घटना नहीं है। यह एक नियोजित वैज्ञानिक प्रभाव (controlled impact) है, जैसा कि पहले भी कई चंद्र मिशनों में किया जा चुका है। क्या होने वाला है? अंतरिक्ष एजेंसियां समय-समय पर ऐसे मिशन संचालित करती हैं जिनमें किसी अंतरिक्ष यान, लैंडर, रॉकेट चरण या विशेष प्रोजेक्टाइल को जानबूझकर चन्द्रमा की सतह से टकराया जाता है। टक्कर के समय अत्यधिक गति के कारण चन्द्रमा की सतह से धूल और चट्टानी पदार्थ ऊपर उठते हैं, जिससे एक नया क्रेटर बनता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस प्रकार की टक्कर से लगभग 30 मीटर व्यास तक का गड्ढा बन सकता है। इसका आकार टक्कर की गति, कोण और यान के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। यह “विस्फोट” वास्तव में क्या है? चन्द्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए वहां पृथ्वी जैसी आग या धमाके वाली विस्फोटक लपटें नहीं बनतीं। “विस्फोट” शब्द का उपयोग आम तौर पर उस ऊर्जा को समझाने के लिए किया जाता है जो टक्कर के समय उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कई किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चन्द्रमा की सतह से टकराती है, तो— सतह की धूल और चट्टानें उछलती हैं, टक्कर स्थल पर गड्ढा बनता है, आसपास का क्षेत्र प्रभावित होता है, और वैज्ञानिक उपकरण उस प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं। धरती से दिखाई देगा नजारा? यदि टक्कर ऐसी स्थिति में होती है कि उसका स्थान चन्द्रमा के उस हिस्से पर हो जो उस समय पृथ्वी की ओर दिखाई दे रहा हो, तो बड़े दूरबीनों (telescopes) के माध्यम से टक्कर की चमक (impact flash) देखी जा सकती है। सामान्य आंखों से ऐसी घटना दिखाई देना बहुत कठिन होता है। अधिकांश मामलों में इसे देखने के लिए— उच्च क्षमता वाले टेलीस्कोप, खगोलीय कैमरे, या वेधशालाओं के उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसलिए “धरती से तबाही का नजारा दिखाई देगा” जैसी बातों को वैज्ञानिक दृष्टि से सावधानी के साथ समझना चाहिए। 30 मीटर का गड्ढा कितना बड़ा होता है? 30 मीटर व्यास का गड्ढा लगभग— एक बड़े भवन के बराबर चौड़ाई, या कई कारों को एक साथ रखने जितनी जगह का हो सकता है। चन्द्रमा पर पहले से ही करोड़ों छोटे-बड़े क्रेटर मौजूद हैं, जिनमें कई किलोमीटर से लेकर सैकड़ों किलोमीटर तक बड़े हैं। इसलिए 30 मीटर का नया गड्ढा चन्द्रमा के विशाल भूभाग की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा माना जाएगा। ऐसे प्रयोग पहले भी हो चुके हैं यह पहली बार नहीं है जब चन्द्रमा पर नियंत्रित टक्कर कराई जा रही है। अंतरिक्ष इतिहास में कई महत्वपूर्ण मिशनों में ऐसा किया गया है। LCROSS मिशन (NASA) नासा ने LCROSS मिशन के दौरान एक रॉकेट चरण को चन्द्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में जानबूझकर टकराया था। उद्देश्य यह पता लगाना था कि वहां जल-बर्फ (water ice) मौजूद है या नहीं। इस टक्कर से उठे धूल के बादल का अध्ययन करके वैज्ञानिकों ने चन्द्रमा पर जल के प्रमाणों को बेहतर तरीके से समझा। अन्य चंद्र मिशन विभिन्न देशों के कुछ चंद्र मिशनों में भी मिशन समाप्त होने के बाद यानों को नियंत्रित तरीके से चन्द्रमा पर गिराया गया है ताकि अतिरिक्त वैज्ञानिक आंकड़े प्राप्त किए जा सकें। वैज्ञानिकों को क्या मिलेगा? इस प्रकार की टक्कर से वैज्ञानिकों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं— 1. चन्द्रमा की सतह की संरचना टक्कर के बाद बाहर निकले पदार्थ का विश्लेषण करके यह समझा जा सकता है कि सतह के नीचे कौन-कौन से खनिज मौजूद हैं। 2. धूल और चट्टानों का व्यवहार चन्द्रमा पर कम गुरुत्वाकर्षण होने के कारण धूल और पत्थरों का फैलाव पृथ्वी से अलग होता है। इसका अध्ययन भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है। 3. भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी यदि भविष्य में चन्द्रमा पर स्थायी आधार (Moon Base) बनाए जाते हैं, तो वहां की मिट्टी, धूल और सतह की मजबूती को समझना आवश्यक होगा। क्या पृथ्वी को कोई खतरा है? इस प्रकार की नियंत्रित चंद्र टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होता। चन्द्रमा की कक्षा स्थिर रहती है, उसका आकार प्रभावित नहीं होता, और 30 मीटर का गड्ढा उसके विशाल आकार की तुलना में अत्यंत छोटा होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी घटना पृथ्वी के लिए किसी भी प्रकार का विनाशकारी जोखिम पैदा नहीं करती। सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों से सावधान रहें हाल के वर्षों में अंतरिक्ष से जुड़ी घटनाओं को लेकर कई भ्रामक दावे वायरल होते रहे हैं। “चन्द्रमा फट जाएगा”, “धरती पर असर पड़ेगा” या “तबाही दिखाई देगी” जैसी बातें अक्सर अतिरंजित या गलत संदर्भ में प्रस्तुत की जाती हैं। विश्वसनीय जानकारी के लिए— NASA, ISRO, ESA, या अन्य आधिकारिक अंतरिक्ष एजेंसियों की घोषणाओं पर भरोसा करना चाहिए। खगोल प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर यदि यह प्रभाव (impact) पृथ्वी से दिखाई देने योग्य स्थिति में होता है, तो खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक रोमांचक अवसर होगा। वे— स्थानीय खगोलीय क्लबों, वेधशालाओं, या ऑनलाइन टेलीस्कोप स्ट्रीम के माध्यम से इस घटना का अवलोकन कर सकते हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation आवारा पशुओं से हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पीड़ित परिवार को 15 लाख मुआवजा देने का आदेश CJP को न सरकार पर भरोसा और न ही सुप्रीम कोर्ट पर? अगले आंदोलन की आहट और विपक्ष की सक्रियता