इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे अमेरिका और ईरान के बीच कैसी भी डील क्यों न हो जाए। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशें तेज हो रही हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। उनका मानना है कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल हो जाता है तो इससे न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सबसे बड़े आलोचकों में रहे हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा किया है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं बल्कि सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी कारण इजरायल लगातार अमेरिका और पश्चिमी देशों से ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक स्तर पर उम्मीदें बढ़ाई हैं। हालांकि नेतन्याहू का मानना है कि केवल समझौते के भरोसे ईरान को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि अतीत में भी ईरान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश की है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू का यह बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। इजरायल में सुरक्षा हमेशा चुनावी मुद्दा रही है और नेतन्याहू अपनी मजबूत सुरक्षा नीति के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर वह अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई समझौता नहीं करेगी। दूसरी ओर, कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में इजरायल की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ा समझौता होता है तो क्षेत्रीय राजनीति में नई परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ईरान ने हमेशा यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। लेकिन इजरायल और पश्चिमी देशों का एक बड़ा वर्ग इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता। फिलहाल नेतन्याहू के बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-ईरान वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और इजरायल इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रणनीति अपनाता है। इतना तय है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम आने वाले समय में भी वैश्विक राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना रहेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे अमेरिका और ईरान के बीच कैसी भी डील क्यों न हो जाए। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशें तेज हो रही हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। उनका मानना है कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल हो जाता है तो इससे न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सबसे बड़े आलोचकों में रहे हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा किया है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं बल्कि सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी कारण इजरायल लगातार अमेरिका और पश्चिमी देशों से ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक स्तर पर उम्मीदें बढ़ाई हैं। हालांकि नेतन्याहू का मानना है कि केवल समझौते के भरोसे ईरान को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि अतीत में भी ईरान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश की है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू का यह बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। इजरायल में सुरक्षा हमेशा चुनावी मुद्दा रही है और नेतन्याहू अपनी मजबूत सुरक्षा नीति के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर वह अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई समझौता नहीं करेगी। दूसरी ओर, कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में इजरायल की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ा समझौता होता है तो क्षेत्रीय राजनीति में नई परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ईरान ने हमेशा यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। लेकिन इजरायल और पश्चिमी देशों का एक बड़ा वर्ग इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता। फिलहाल नेतन्याहू के बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-ईरान वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और इजरायल इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रणनीति अपनाता है। इतना तय है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम आने वाले समय में भी वैश्विक राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना रहेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे अमेरिका और ईरान के बीच कैसी भी डील क्यों न हो जाए। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशें तेज हो रही हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। उनका मानना है कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल हो जाता है तो इससे न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सबसे बड़े आलोचकों में रहे हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा किया है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं बल्कि सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी कारण इजरायल लगातार अमेरिका और पश्चिमी देशों से ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक स्तर पर उम्मीदें बढ़ाई हैं। हालांकि नेतन्याहू का मानना है कि केवल समझौते के भरोसे ईरान को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि अतीत में भी ईरान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश की है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू का यह बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। इजरायल में सुरक्षा हमेशा चुनावी मुद्दा रही है और नेतन्याहू अपनी मजबूत सुरक्षा नीति के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर वह अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई समझौता नहीं करेगी। दूसरी ओर, कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में इजरायल की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ा समझौता होता है तो क्षेत्रीय राजनीति में नई परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ईरान ने हमेशा यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। लेकिन इजरायल और पश्चिमी देशों का एक बड़ा वर्ग इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता। फिलहाल नेतन्याहू के बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-ईरान वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और इजरायल इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रणनीति अपनाता है। इतना तय है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम आने वाले समय में भी वैश्विक राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना रहेगा। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation ईरान-अमेरिका डील के बाद नेतन्याहू को सबसे बड़ा झटका! जिस जंग पर लगाया था राजनीतिक दांव, वही बन गई चुनौती भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिली नई मजबूती, PM मोदी और स्लोवाकिया नेतृत्व ने रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति