उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘साइ-वज्र’ अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अभियान के दौरान साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में इन आरोपियों के तार लगभग 2.55 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।

‘साइ-वज्र’ अभियान के तहत कार्रवाई

साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘साइ-वज्र’ अभियान के तहत पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी विभिन्न तरीकों से लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाते थे। हालांकि पुलिस अभी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

2.55 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े मिले तार

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के कथित संबंध लगभग 2.55 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों से सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस राशि का लेन-देन किन खातों के माध्यम से हुआ और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

कैसे करते थे ठगी?

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग अक्सर लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाते हैं। इनमें फर्जी कॉल, नकली बैंक अधिकारी बनकर संपर्क करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर जानकारी लेना, निवेश का झांसा देना, ऑनलाइन नौकरी का लालच, सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी और फर्जी लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी हासिल करना जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं।

हालांकि इस मामले में आरोपियों द्वारा अपनाए गए सटीक तरीके की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस कर रही है गहन जांच

गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य राज्यों से भी है या नहीं। यदि जांच में किसी बड़े गिरोह की पुष्टि होती है, तो अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके।

साइबर अपराध बढ़ती चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में देशभर में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। डिजिटल भुगतान, इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

इसी कारण पुलिस और साइबर सेल लगातार लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ ऐसे गिरोहों के खिलाफ विशेष अभियान भी चला रही हैं।

नागरिक कैसे रहें सुरक्षित?

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं—

  • किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक पासवर्ड या सीवीवी साझा न करें।
  • किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
  • केवाईसी अपडेट, लॉटरी, इनाम या नौकरी के नाम पर आने वाले संदेशों की सत्यता जांचें।
  • किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

पुलिस की अपील

गाजीपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई दे या साइबर ठगी का प्रयास किया जाए, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। समय पर शिकायत मिलने से कई मामलों में ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।

 

 

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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