सफलता अक्सर उन्हीं लोगों के कदम चूमती है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुनते हैं। बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले गुंजन कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। JEE Advanced जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक की तैयारी के दौरान उनके सामने ऐसी स्वास्थ्य चुनौती आ गई, जिसने किसी भी छात्र का आत्मविश्वास डगमगा सकता था। लेकिन गुंजन ने हार नहीं मानी और अपने साहस, धैर्य तथा दृढ़ संकल्प के दम पर लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए। परीक्षा से पहले आई बड़ी चुनौती गुंजन कुमार को JEE Advanced की तैयारी के लिए कोटा भेजा गया था, जहां देशभर से हजारों छात्र इंजीनियर बनने का सपना लेकर पहुंचते हैं। पढ़ाई अपने अंतिम चरण में थी और परीक्षा नजदीक थी। तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जांच में पता चला कि उन्हें न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) हो गया है। यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें फेफड़े के आसपास हवा भर जाने के कारण फेफड़ा आंशिक या पूरी तरह सिकुड़ सकता है। यह एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें तुरंत इलाज और आराम की आवश्यकता होती है। तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा बीमारी के कारण गुंजन को लगभग तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान वे न तो नियमित रूप से कोचिंग क्लास में जा सके और न ही पहले की तरह पढ़ाई कर पाए। डॉक्टरों ने उन्हें पूरा आराम करने की सलाह दी। एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के लिए यह समय बेहद कठिन था। परीक्षा नजदीक थी और पढ़ाई का महत्वपूर्ण समय इलाज में गुजर रहा था। लेकिन गुंजन ने इस चुनौती को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। नहीं छोड़ा पढ़ाई का साथ स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद गुंजन ने पढ़ाई से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। जब भी उनकी तबीयत अनुमति देती, वे नोट्स पढ़ते, पुराने प्रश्नपत्र देखते और अपनी तैयारी को जितना संभव हो, जारी रखते। उन्होंने यह समझा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन हमारा प्रयास और सकारात्मक सोच जरूर हमारे हाथ में होती है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। मानसिक मजबूती बनी सबसे बड़ी ताकत किसी भी गंभीर बीमारी के दौरान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक संघर्ष भी उतना ही बड़ा होता है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण कई छात्र निराश हो सकते थे, लेकिन गुंजन ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने अपने लक्ष्य पर विश्वास नहीं खोया और यह भरोसा रखा कि यदि पूरी मेहनत ईमानदारी से की गई है, तो परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलेगा। परिवार और शिक्षकों का मिला साथ ऐसे कठिन समय में गुंजन के परिवार और शिक्षकों ने उनका पूरा साथ दिया। परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा, जबकि शिक्षकों ने पढ़ाई से जुड़े मार्गदर्शन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। किसी भी छात्र के जीवन में परिवार और गुरु का सहयोग कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुंजन की कहानी भी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा गुंजन कुमार की संघर्ष यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से मिलती है। आज जब कई छात्र छोटी-छोटी परेशानियों से निराश हो जाते हैं, तब गुंजन की कहानी बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन मजबूत हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी पार की जा सकती है। स्वास्थ्य भी है उतना ही जरूरी यह घटना छात्रों को एक और महत्वपूर्ण सीख देती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। लगातार पढ़ाई के बीच पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, हल्का व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। यदि किसी छात्र को सांस लेने में तकलीफ, सीने में तेज दर्द या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सफलता का असली अर्थ गुंजन की कहानी केवल परीक्षा की सफलता तक सीमित नहीं है। यह कहानी कठिन परिस्थितियों से लड़ने, उम्मीद बनाए रखने और अपने सपनों को जीवित रखने की है। उनका संघर्ष यह साबित करता है कि जीवन में आने वाली चुनौतियां हमें रोकने नहीं, बल्कि और मजबूत बनाने के लिए आती हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation मेडिकल जगत में बड़ी सफलता: डायबिटीज मरीजों के लिए भारत में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला साप्ताहिक इंसुलिन इंजेक्शन ‘Awiqli’