Vidisha जिला अस्पताल से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण एक सात महीने के प्रीमैच्योर नवजात की मौत हो गई, जबकि उसकी मां की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और वह आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

अस्पताल के गेट पर हुआ प्रसव

जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर महिला को आवश्यक चिकित्सा सुविधा नहीं मिली।

इसी दौरान प्रसव पीड़ा बढ़ गई और महिला ने अस्पताल के मुख्य गेट पर ही एक प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म दे दिया। यह घटना वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद दर्दनाक थी। लोगों का कहना है कि यदि समय पर महिला को भर्ती कर उचित इलाज दिया जाता, तो शायद यह स्थिति नहीं बनती।

7 महीने के नवजात ने तोड़ा दम

महिला ने सात महीने के प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म दिया था। समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात को विशेष चिकित्सा देखभाल और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की आवश्यकता थी।

हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद नवजात की जान नहीं बचाई जा सकी और उसने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

मां की हालत गंभीर, ICU में भर्ती

इस पूरी घटना के बाद प्रसूता की हालत भी बिगड़ गई। उसे गंभीर स्थिति में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।

डॉक्टरों के अनुसार, महिला की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उसकी लगातार निगरानी की जा रही है। परिवार के लोग मां और बच्चे दोनों की स्थिति को लेकर गहरे सदमे में हैं।

परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

मृत नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई और अस्पताल स्टाफ ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते डॉक्टर और नर्सें सक्रिय हो जातीं, तो मां और बच्चे दोनों की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और स्थानीय लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और आपातकालीन सेवाओं पर सवाल खड़े करती है। अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां समय पर इलाज नहीं मिलने या अस्पताल प्रबंधन की कमी के कारण मरीजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। थोड़ी-सी देरी भी मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

लोगों में आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।

स्थानीय नागरिकों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता, पर्याप्त स्टाफ और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में त्वरित चिकित्सा सहायता और संवेदनशील व्यवहार जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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