Sehore जिले के भैरूंदा क्षेत्र में किसानों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतर आए हैं और “डेरा डालो-घेरा डालो” आंदोलन के तहत प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन में 1500 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ हजारों किसान शामिल हुए, जिससे कई प्रमुख सड़कों पर लंबा जाम लग गया और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक जिला कलेक्टर स्वयं मौके पर नहीं पहुंचते और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बड़ी संख्या में जुटे किसान भैरूंदा में सुबह से ही आसपास के गांवों से किसान अपने ट्रैक्टर लेकर पहुंचने लगे थे। देखते ही देखते आंदोलन स्थल पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों ने कई मार्गों को जाम कर दिया, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है और कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें? आंदोलन कर रहे किसानों की कई मांगें हैं। इनमें फसलों का उचित दाम, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, बिजली से जुड़ी समस्याओं का समाधान, मुआवजा वितरण और अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़े किसान प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कर दिया है कि वे किसी छोटे अधिकारी से बातचीत नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक जिला कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचते और लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि पहले भी कई बार अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिए गए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसलिए इस बार वे केवल कलेक्टर से ही बातचीत करना चाहते हैं। प्रशासन की बढ़ी चिंता आंदोलन के कारण प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में किसानों और ट्रैक्टरों के एकत्र होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर तैनात है। अधिकारियों द्वारा किसानों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। यातायात पर पड़ा असर 1500 से अधिक ट्रैक्टरों के सड़क पर उतरने से कई प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित हो गया। यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा और कई लोग घंटों जाम में फंसे रहे। स्थानीय व्यापार और परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिला। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे आवश्यक होने पर ही प्रभावित मार्गों का उपयोग करें। किसानों का कहना- समस्याओं का समाधान चाहिए प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए है। उनका आरोप है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उचित मूल्य और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कई किसानों ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान देते, तो उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल किसानों के इस बड़े आंदोलन ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने किसानों के समर्थन में बयान दिए हैं और सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और बातचीत के जरिए जल्द ही कोई रास्ता निकाला जाएगा। समाधान की उम्मीद प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है और जल्द ही सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, किसान फिलहाल अपने रुख पर कायम हैं और कलेक्टर के आने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation इंदौर में ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, 50 करोड़ की लागत से बनेगा नया फ्लाईओवर विदिशा जिला अस्पताल की लापरवाही ने ले ली जान; गेट पर जन्मे 7 महीने के प्रीमैच्योर नवजात ने तोड़ा दम, मां अब भी ICU में वेंटिलेटर पर