एक प्री-स्कूल में हुई हैरान करने वाली घटना ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 23 महीने के एक मासूम बच्चे को उसी स्कूल में पढ़ने वाले लगभग ढाई साल के बच्चे ने कथित तौर पर 25 बार काट लिया। घटना के बाद बच्चे के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने स्कूल के CEO समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बच्चा रोज की तरह प्री-स्कूल गया था। जब परिजन उसे लेने पहुंचे, तो उन्होंने उसके शरीर पर कई जगह लाल निशान और चोट के निशान देखे। बच्चे की हालत देखकर परिवार हैरान रह गया।

परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने पहले घटना की पूरी जानकारी देने से परहेज किया और बाद में बताया गया कि दूसरे बच्चे ने खेल-खेल में काट लिया था। लेकिन जब बच्चे की मेडिकल जांच कराई गई, तो उसके शरीर पर कई जगह काटने के निशान पाए गए।

परिवार का कहना है कि इतने छोटे बच्चे को इतनी बार काटे जाने के बावजूद स्कूल स्टाफ को इसकी जानकारी न होना या समय पर हस्तक्षेप न करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

स्कूल प्रशासन पर उठे सवाल

घटना सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर स्कूल में बच्चों की निगरानी कैसे की जा रही थी। प्री-स्कूल में आमतौर पर छोटे बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की व्यवस्था होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने छोटे बच्चों को एक पल के लिए भी बिना निगरानी के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यदि बच्चा कई बार काटा गया, तो यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जाएगी।

परिजनों का आरोप

पीड़ित बच्चे के परिवार ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि घटना के समय उन्हें तुरंत सूचित किया जाता, तो वे समय पर बच्चे का उपचार करा सकते थे।

परिवार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी माता-पिता के लिए बेहद डरावनी हैं।

पुलिस ने दर्ज की FIR

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्कूल के CEO समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि—

  • घटना के समय बच्चे की निगरानी कौन कर रहा था?
  • क्या स्कूल में पर्याप्त स्टाफ मौजूद था?
  • क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था?
  • घटना के बाद परिजनों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई?

पुलिस ने स्कूल के कर्मचारियों और प्रबंधन से भी पूछताछ शुरू कर दी है।

मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेडिकल जांच में बच्चे के शरीर पर कई जगह काटने के निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों ने बच्चे की शारीरिक स्थिति का परीक्षण किया और उसे आवश्यक उपचार दिया।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का असर केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बच्चे पर पड़ सकता है।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर बहस

यह घटना सामने आने के बाद एक बार फिर प्री-स्कूल और डे-केयर सेंटरों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई है। माता-पिता का कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण की उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों के लिए बने संस्थानों में सुरक्षा और निगरानी के सख्त मानक होने चाहिए। इसके साथ ही कर्मचारियों को बच्चों के व्यवहार और आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि दो से तीन साल की उम्र के बच्चे कभी-कभी गुस्से, डर या अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए काटने जैसी हरकत कर सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में शिक्षकों और देखभाल करने वाले स्टाफ की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों पर लगातार नजर रखें और किसी भी घटना को तुरंत रोकें।

अभिभावकों में बढ़ी चिंता

घटना के बाद कई अभिभावकों ने छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर भी लोग स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

 

 

 

 

 

रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी

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