योग दिवस को लेकर देशभर में उत्साह, कोलकाता में होगा मुख्य आयोजन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को लेकर देशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं। हर वर्ष 21 जून को मनाए जाने वाले इस वैश्विक आयोजन का मुख्य कार्यक्रम इस बार पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। केंद्र सरकार, आयुष मंत्रालय, राज्य प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इस कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। योग दिवस के अवसर पर लाखों लोग एक साथ योगाभ्यास करेंगे, जबकि देश और विदेश के करोड़ों लोग डिजिटल माध्यमों से इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे। सरकार का उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक करना है। कोलकाता में होगा मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया जाएगा, जहां हजारों योग साधक, छात्र, खिलाड़ी, सामाजिक संगठन और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां हिस्सा लेंगी। विशाल खुले मैदान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में योग के विभिन्न आसनों और प्राणायाम का सामूहिक प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजकों का दावा है कि यह कार्यक्रम अब तक के सबसे बड़े योग आयोजनों में से एक हो सकता है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। योग दिवस का बढ़ता वैश्विक प्रभाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के बाद से योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस और खाड़ी देशों सहित अनेक देशों में भारतीय दूतावास और स्थानीय संगठन विशेष योग कार्यक्रम आयोजित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योग भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। स्वास्थ्य और फिटनेस पर विशेष जोर आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याओं के बीच योग को एक प्रभावी उपाय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योगाभ्यास से: मानसिक तनाव कम होता है। शरीर की लचीलापन बढ़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। रक्तचाप नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। एकाग्रता और मानसिक संतुलन बेहतर होता है। इसी कारण सरकार योग को “Preventive Healthcare” यानी रोगों की रोकथाम का महत्वपूर्ण साधन मान रही है। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम योग दिवस को लेकर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों को योग के महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए कार्यशालाएं, प्रतियोगिताएं और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में योग की आदत विकसित होने से छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रहेगा फोकस इस बार योग दिवस के दौरान डिजिटल भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार और आयुष मंत्रालय विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से योग सत्रों का सीधा प्रसारण करेंगे। इससे देश-विदेश में बैठे करोड़ों लोग कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे। मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से भी योग जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय की विशेष पहल आयुष मंत्रालय ने योग दिवस को सफल बनाने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। इनमें शामिल हैं: सामुदायिक योग शिविर योग प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में योग जागरूकता अभियान महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष योग सत्र स्वास्थ्य केंद्रों पर योग कार्यशालाएं मंत्रालय का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा योग दिवस केवल स्वास्थ्य का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग पर्यटन (Yoga Tourism) का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। हर साल हजारों विदेशी पर्यटक भारत में योग और ध्यान सीखने आते हैं। कोलकाता में आयोजित होने वाला मुख्य कार्यक्रम भी राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में योग के प्रति महिलाओं और युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ी है। फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में युवा योग को अपना रहे हैं। इस बार योग दिवस के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों, युवा संगठनों और खेल संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योग: स्वस्थ भारत का आधार सरकार का मानना है कि “स्वस्थ भारत” के निर्माण में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि लोग नियमित रूप से योग को अपनाएं तो स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम हो सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का एक संपूर्ण विज्ञान माना जाता है। रिपोर्टर * श्रीमती शोभा भाटी Post navigation ईरान-इजरायल तनाव पर दुनिया की नजर: क्षेत्रीय शांति को लेकर बढ़ी चिंता, कूटनीतिक प्रयास तेज महिला टी-20 विश्व कप में भारत की पाकिस्तान पर शानदार जीत, दीप्ति शर्मा ने 5 विकेट लेकर रचा इतिहास