रसोई गैस सिलिंडर की कमी के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिलने की वजह से अब लोग वैकल्पिक व्यवस्था की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई है। शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में तीन से चार गुना तक का इजाफा दर्ज किया गया है। दुकानदारों के अनुसार पहले जहां इंडक्शन चूल्हों की बिक्री सीमित मात्रा में होती थी, वहीं अब हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक इन्हें खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। खासकर वे परिवार जिनके यहां गैस सिलिंडर समय पर नहीं पहुंच पा रहा है, वे खाना बनाने के लिए इंडक्शन को एक आसान विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। इसके अलावा बिजली की उपलब्धता होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी इंडक्शन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती मांग का असर बाजार कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। इंडक्शन चूल्हे बनाने वाली कंपनियों ने कुछ ही दिनों के भीतर अपने उत्पादों के दामों में लगभग 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। बाजार में पहले जो इंडक्शन चूल्हा 1500 से 2000 रुपये के बीच मिलता था, उसकी कीमत अब बढ़कर 1700 से 2200 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि कीमत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी बढ़ गई है कि कई बार स्टॉक भी खत्म हो जा रहा है। कंपनियों से नए माल की सप्लाई आने में भी समय लग रहा है, जिससे बाजार में इसकी कमी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस सिलिंडर की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग और बढ़ सकती है। इससे न केवल बाजार में इसकी बिक्री बढ़ेगी बल्कि कीमतों में भी और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल गैस संकट के बीच इंडक्शन चूल्हा लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर सामने आया है।